अयोध्या काण्ड – ल लद्दाख की कहानी (पार्ट 4)

चैप्टर 3 (पार्ट 2)

आपकी बे में आपकी डेस्क शेयर करने वाला बंदा आपकी डेस्क वॉल पर ‘चे’ चिपकाता है तो सोचो क्या सब होने वाला है!

Travel Triangle के दिनों में एक और क्रांतिकारी बन्दे ने आग में काफी ज़्यादा घी डालने का काम किया! अब ये सोचो की आपकी बे में आपकी डेस्क शेयर करने वाला बंदा आपकी डेस्क वॉल पर ‘चे’ चिपकाता है तो आपके ऑफिस के दिन कैसे बीतने वाले हैं. कंपनी छोड़ने के बाद भी कुणाल से बकचोदी चलती रहती है. कुणाल  को जब Le Ladakh का बताया तो उन्होंने फ़ट ट्रेवल ट्राइएंगल टीम को आईडिया पिच करने को कहा – स्पॉन्सरशिप के लिए! पैसों और बजट का हिसाब लगाकर टोटल खर्चा ₹106,220.00 का बन रहा था!

पैसों और बजट का हिसाब लगाकर टोटल खर्चा ₹106,220.00 का बन रहा था!

Narry को सीन बताने के बाद अब बारी थी 15 लोगों के लिए गाड़ी की. फ़ोर बाय फ़ोर से कम में काम भी नहीं चलना था. रेंटेड सेल्फ़ ड्राइव कार का लोचा था – लेह में बाहर वालों के लिए एंट्री नहीं है बिना मालिक की गाड़ी को! हमें हमारा यशु याद आया – एकदम जीसस की तरह. यशु यानी यश ठाकुर सैंज में एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन के लिए एक NGO चलाते हैं, साथ में टूर ऑपरेटर का भी काम है. बिलकुल भाई जैसा है लौंडा — अपनी पर आ जाए तो मतलब आग लगा देने वाला!
“मुझे 5 दिन का टाइम दो यराओ” — यशु गाड़ी की जुगाड़ में लग गया। अब 15 दिन के लिए लद्दाख़ जैसी ट्रिप पर कोई बन्दा गाड़ी लेकर ऐसे ही मुँह उठा के तो नहीं ही आ जाएगा।

यश ठाकुर सैंज में एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन के लिए एक NGO चलाते हैं

यशु को ट्रिप की ज़रूरतें बताकर हम लग गए बाकी की गाड़ियों की सोर्सिंग में। हमें, बेसिकली 1 कार और 2 बाइक्स चाहिए थीं। 2 बाइक्स का जुगाड़ तो आसान था, सो हमने अपना फुल कॉनसंट्रेशन एक ‘4 बाय 4’ कार लेकर साथ ट्रिप पर चलने वाले बन्दे की खोज में लगा दिया। डिज़िटल ट्रैवल इंडस्ट्री में जो सबसे क्रांतिकारी चीज़ निकल कर सामने आई है, वो हैं प्राइवेट/क्लोज़्ड Facebook ग्रुप्स। अगर आप ट्रैवल इंडस्ट्री में हैं और आप इन ग्रुप्स के नफ़े नुकसान से वाकिफ नहीं हैं तो आप धंधे में पीछे हैं।

वैसे, इन ग्रुप्स के फलने फूलने का सबसे बड़ा कारण एक ही है – फियर ऑफ मिसिंग आउट. सब को सब कुछ करना है और अभी ही करना है. बिफ़ोर, इट्स टू लेट. सबसे पहले सब काम करके सबको ये बताना है – बीन देयर, डन दैट! सोशल मीडिया ने यही तो किया है – आइडेंटिटी और रिकॉग्निशन की भूखी एक पूरी जमात को एक ओपीनियनेटेड एंड इंफोर्मड भीड़ में बदल दिया और इसी भीड़ से चल रहे हैं आजकल के सारे धंधे। अब अगर आप इस मायानगरी की तमाम बेट्स को क्रैक कर लेते हैं, तो सोशल मीडिया से बेहतर भी कुछ नहीं है। हम जैसे लोगों के लिए सोशल मीडिया एक ऐसा टूल है जो जीने को रोटी भी दे सकता है और ज़िन्दगी जीतने के मौके भी।

“Hi, we are a group of travel bloggers who are planning a trip to Ladakh as the paases open this year. The catch of the trip is that we are planning to travel with performing and visual artists on a self supported expedition for 15 days starting 15th June from Delhi.
We have sorted it out all on our front and are looking out for somebody who can help us out with a 4 by 4 cars of their own. You would be joining us as a part of the expedition and we will be taking care of all your expenses.”

इससे पहले हमने ट्रिप पर एलीजिबल बंदे ढूंढने के लिए भी सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली थी। कि ऐसा वैसा है और हम ये सब करने वाले हैं और ये बहुत ही हार्ड कोर एडवेंचर होने वाला है, तो जो भी चलना चाहें वो चल सकते हैं। हम आपको पार्शियाली स्पॉन्सर करेंगे। झड़ी लग गई, ऐप्प्लिकेशन्स की। एक का तो जवाब ये आया — “Hi Team, I can do whatever you want me to do for this expedition”. हमें अपने देश के युवाओं और कलाकारों की होपेलेसनेस दिखी। क्या सच में इतना सस्ता है हमारे सोशल मीडिया धुरंधरों का विश्वास जीतना? 5 लौंडों की इस कॉन्सेप्ट पर लोग अपना सब कुछ देने तक की बात करने लगे या शायद सोशल मीडिया वाली बातों को हम कुछ ज़्यादा ही सीरियसली ले रहे थे!

मिशेल लगभग हमारी ही उम्र की हैं, बेहद सुलझी और शांत

फेसबुक ग्रुप से ही हमें कनाडा की मिशेल मिलीं। लगभग हमारी ही उम्र की, बेहद सुलझी और शांत। इन्ने अपना पार्टनर ले चलने की डिमांड मीटिंग खत्म होने से पहले रख दी थी। अब जो इनका पार्टनर था, वो है Jose। चिली का बन्दा जो मिशेल को गोआ में मिला – मिशेल लगभग 3 महीने से इंडिया में योग सीख और सिखा रहीं थी तब। Jose उस समय धर्मशाला में था और मिशेल हमसे मिलने के बाद धर्मशाला जा रहीं थीं। Jose से पहली बार वीडियो कॉल पर मिलकर पता चला कि ये बन्दा जगलिंग वगैरह भी करता है और एक्रो योगा तो है ही।

ये 2 बंदे फाइनल करने के बाद, अब बारी थी कुछ स्केच या ग्राफिटी आर्टिस्ट्स ढूंढने की। चंडीगढ़ के दो लौंडों से बात चल रही थी। एक सरदार जी हैं – अपना YouTube चैनल चलाते हैं। इन्होंने ने भी हमारा फॉर्म भरा था। इनसे मिलना तय हुआ अपने दिल्ली वाले अड्डे पर। दो भाई पहुंचे हमसे मिलने, चंडीगढ़ से हरयाणा शक्ति पकड़ के। हमने काम देखा, इनका एक्सपीरियंस सुना और ऑलमोस्ट कन्विंस हो गए कि दीपक साथ चल रहा है। दीपक हमें 2 3 दिन में कन्फर्म करने का बोलकर जो निकले, उसके बाद बस कैंसिल करने के लिए एक बार फोन किया और उसके बाद से जब जब कोई नई वीडियो उपलोड करता है, उसकी खबर देता है।

तो स्केच आर्टिस्ट्स की खोज जारी है। इधर Ollie को बैंगलोर के बद्री भाई, फेसबुक पर मिले। इनके पास बोलेरो कैंपर है – फुल्ली कस्टमाइज्ड। पानी की टंकी वगैरह सब लगी है। बद्री साउथ इंडिया में चक्कर लगाते रहते हैं – इस बात का सबूत उन्होंने ताबड़ तोड़ फोटोज़ भेजकर बताना शुरू किया। हमारे तो वारे न्यारे। अब सोचो कि सोशल मीडिया पे अभी अभी मिला बन्दा अगर बैंगलोर से दिल्ली, दिल्ली से लद्दाख और फिर लद्दाख से वापस बैंगलोर की ट्रिप मार रहा है, वो भी खुद ड्राइव करके, अपने खर्चों पर। हमारे लिए ये टू गुड टू बी ट्रू था, लेकिन अब आप किसी की बात का भरोसा उसको सुनकर ही करोगे। बद्री भाई का रेस्पांस और उनकी रोज़ के वाट्सएप्प फॉरवर्ड्स ने हमें ये पक्का यकीन दिला दिया था कि ही इज़ ऑवर गाय।

ट्रिप की आइटिनररी हमने इस तरह से डिज़ाइन किया था कि हम सबसे कम भीड़ भड़ाके वाले रास्ते से जाएं और आएं। प्लान ये था कि मुग़ल रोड पर पीर की गली पास से होकर श्रीनगर जाएंगे और श्रीनगर से ही सारा कार्यक्रम शुरू होगा। श्रीनगर के बाद, मुलबेख, अलची, लेह, तुरतुक, हुन्डर, पैंगोंग, सो मोरिरी, सरचू और बारालाछा पास होते हुए डलहौज़ी में लास्ट नाईट कैंपिंग करके दिल्ली वापस आने का प्लान था।

ट्रिप की आइटिनररी

पैसों का जुगाड़ अभी तक बिना किसी एक्सटर्नल सपोर्ट के भी ठीक ठाक चल रहा था। प्लानिंग की डिटेल्स पर हमने काम करना शुरू किया। खाने पीने के राशन और चूल्हे बर्तन का जुगाड़ भी शुरू हुआ। यश की स्कार्पियो और बद्री भाई की बोलेरो कैंपर के भरोसे, Le Ladakh अब शेप ले रहा था। मिशेल, होज़े, के अलावा अब तक कोई फाइनल नहीं था। हाँ, एक क्लाउन का आईडिया पता नहीं कहाँ से आ गया – कार्निवाल शायद धीरे धीरे सीप इन कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि अब तक जो कुछ सीखा है, जितना जाना है और जितना आता है – सब कुछ इस ट्रिप के लिए ही है. अपने रामायण में भी तो दोनों भाईयों की लर्निंग्स को अयोध्या काण्ड में ही टेस्ट किया गया है. क्या ये हमारी ट्रिप का अयोध्या काण्ड चल रहा था?

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