सियाचिन ग्लेशियर – ख़्वाब तो हम Bawray Banjaray भी देखते है!

एक नया रोड बना है लद्दाख में, चाइना बार्डर के पास! आर्मी के लिए और कनेक्टिविटी के लिए उस पर एक ब्रिज भी बनाया गया है. उसका उदघाटन करने अपने रक्षा मंत्री जी आये थे लद्दाख़ और धमाके करने की जैसी रीत अपने इस वाले मंत्रिमंडल की रही है, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने भी एक बड़ा बम फोड़ दिया. लद्दाख़ से जाते जाते साब ने सियाचिन ग्लेशियर को जनता के लिए खोल दिया.

इस बात के कई मायने निकाले जा सकते है, जैसा कि कुछ महीने पहले हुआ था. लद्दाख को यूनियन टेरिटरी बनाने के बाद पूरी की पूरी ट्रैवल फरटेनिटी को इस बात का कीड़ा काट गया था कि लद्दाख़ के UT बनने के बाद सबसे पहले वहां कौन जायेगा या गया या फिर ज़ांस्कर और लाहौल को जोड़ने वाले शिंकु ला पर गाड़ियाँ चढ़ाने की होड़ ने कौन आगे निकलेगा. अब बारी आएगी सियाचिन जाने वाले रास्ते की. बाकी तो बहुत कुछ होगा पर सबसे पहले तुरतुक से हिंदुस्तान का आखिरी गाँव होने का रुतबा छिना जायेगा और फिर पहुँचेगी वंडरलस्टीयों की फ़ौज. इंस्टाग्राम को और फोटोज़ मिलेंगे और मचेगी सियाचिन ग्लेशियर में तबाही।

यह तो हुई ट्रैवल वालों की बात! दुनिया भर में क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग के कारण बर्फ़ पिघल रही है और सियाचिन भी इससे बचा हुआ नहीं है. उसपे अब जब इसे आम जनता के लिए भी खोल दिया गया है तब फुटफॉल बढ़ने से ग्लेशियर का माहौल और ज़ियादा बिगड़ने लगेगा। आर्मी के वहाँ रहने से पहले ही काफ़ी नुकसान पहुँच रहा है और लोगों के आने से बर्फ़ और तेज़ी से पिघलने लगेगी. अब जो होने है वो तो हो कर रहेगा, मोदी जी का अटल विश्वास है इसमें.

पर वहां जाने से होने वाली बातों से पहले यह भी तो जानना जरूरी है कि सियाचिन कैसे जा सकते है, सियाचिन कौन कौन जा सकता है, ग्लेशियर में कहाँ तक जाया जा सकता है, सियाचिन जाने के लिए रोड है तो कैसी है ? इनमें से बहुत सवाल अभी तक बिना किसी जवाब के ही भटक रहे हैं. वैसे यह तो क्लियर कर दिया गया है कि सियाचिन ग्लेशियर में आम टूरिस्ट्स कितना आगे तक जा सकते है — सियाचिन बेस कैंप से आगे, बीच ग्लेशियर में एक फ़ॉरवर्ड बेस है, कुमार पोस्ट के नाम से. आम टूरिस्ट्स को यहीं तक आने का परमिट दिया जाएगा, जब तुरतुक आने का भी परमिट बनता है तो सियाचिन का भी परमिट तो लगेगा ही न. अब सवाल यह है कि क्या तुरतुक वाले परमिट में ही सियाचिन को जोड़ा जायेगा या फिर सियाचिन के लिए कोई खास परमिट बनाना पड़ेगा.

जब तक सरकार या आर्मी की ओर से कोई ऑफिसियल स्टेटमेंट नहीं आ जाता है तब तक बैठिये, मिल कर सियाचिन ग्लेशियर जाने के सपने देखते हैं. सपने से याद आया के साल्तोरो रिज पर खड़े हो कर कराकोरम रेंज को देखने का सपना तो हम भी देख रहे है. उस दिन का इंतज़ार रहेगा!

सियाचिन ग्लेशियर – दुनिया के सबसे ऊँचे बैटल फ़ील्ड में टूरिज़्म के फ़ायदे और नुकसान

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