Icy roads of Winter Spiti

विंटर में स्पीति ट्रिप – A Bawray Banjaray Guide

लिट्रेचर और ख़ास तौर पर पोएट्री पढ़ने या करने वालों के बारे में जनरल ओपिनियन यही होती है कि किसी जगह या किसी चीज़ के बारे में बताने के लिए ऐसे लोग उपमा और विशेषण की ऐसी तैसी कर देते हैं. लेकिन, यह हंड्रेड परसेंट सही नहीं है। हमें ख़ुद में इसका बहुत सटीक एग्ज़ाम्पल दिखा – जब हम अपना सिर कंप्यूटर में घुसा के स्पीति वैली के बारे में कुछ लिखने की कोशिश करने बैठे। क्या लिखें, कैसे लिखें, कुछ भी मालूम नहीं चलता है और फिर हम यह सोच के रह जाते हैं कि शायद स्पीति के किस्से और डाइमेंशन्स हमारे शब्दों की बाउंड्री से बहुत आगे है। हालाँकि, कोशिश की है, स्पीति वैली, वहां के लोग, उनकी लाइफ और सभ्यता को जानने और समझने की. हिमालय के ऊँचे बर्फीले पहाड़ों के हिस्से में सिविलाइज़ेशन के लाइफ साईकल का टाइम स्केल ही अलग है.  हमसे पूछेंगे तो हम कहेंगे — “इनका लाइफ साईकल हिमालय के साथ चलता है, उतना धीमा जितना होना चाहिए।” 

पहाड़ और सड़क में ज्यादा फ़र्क़ नहीं रहता हैं यहाँ

स्पीति से पहली इंटरेक्शन पर ऐसा लगा जैसे वक़्त घूमता घूमता स्पीति पहुंचा हो और ठंड में किसी ने उसे गर्म चाय और ब्लैंकेट के साथ तंदूर के पास बिठा दिया। ठंड में सब कुछ भुला के वक़्त वहीं बैठ गया हो । अब जब वक़्त ही थम जाए, तो ज़िंदगी कितनी ज़्यादा अलग हो जाएगी! तमाम मुश्क़िलात के बावजूद भी, हमेशा की तरह यहाँ की  सभ्यता ज़िंदगी को आगे बढ़ाते रहने का मौका और बहाना ढूंढ ही लेती है। 

स्पीति वैली के लोगों की लाइफ तो मुश्किल है ही, ट्रैवेलर्स के लिए यहाँ पहुँचना उससे भी ज़्यादा डिफ़ीकल्ट है, ख़ास कर के सर्दियों में। जब नवंबर दिसंबर में बर्फ पड़ना शुरू होती है और रोहतांग के साथ साथ कुंजुम ला भी बंद हो जाता है, सर्दियों में स्पीति पहुंचने का सिर्फ एक रास्ता रह जाता है! हिंदुस्तान-तिब्बत हाईवे पर सतलुज नदी का पीछा करते हुए किन्नौर से आगे निकल कर स्पीति और सतलुज के संगम पर सतलुज छोड़ के स्पीति के साथ हो लेने वाला ये रास्ता ही विंटर स्पीति एक्सपेडिशन्स की मार्केट चलाता है.

Langza in winter
बुद्धा जी हमेशा की तरह बड़े इत्मीनान से निहारे जा रहे हैं।

हम एक गाइड लिखने बैठे थे!  विंटर स्पीति के लिए पर स्पीति जैसा करते आयी है हमारे साथ वैसा ही हो रहा है! गाइड में इंफॉर्मेशन जैसी कोई चीज़ तो अभी तक हमने लिखा ही नहीं है. इसलिए, इससे पहले कि स्पीति हमारे सर पर चढ़ के नाचे,  हमारे और आपके मतलब की कुछ बात करते हैं और आते है वापिस विंटर स्पीति की गाइड पर।

Chaacha – Chaachi Of Spiti Valley | बोध दोरजी और उनकी धर्मपत्नी चंद्रा

Roads in winter
और तो और कभी कभी नदी भी नहीं दिखती कि ज़मी है या बाह रही है।

शुरू करते है विंटर स्पीति ट्रिप की पॉपुलर इटिनररी से: 

  • पहला दिन – दिल्ली से शिमला/रामपुर – दिल्ली से ओवरनाइट बस
  • दूसरा दिन – शिमला/रामपुर से रेकोंग पीओ – शिमला से सुबह वाली बस आप को शाम तक रेकोंग पीओ पहुंचा देगी। 
  • तीसरा दिन – रेकोंग पीओ से काज़ा वाया नाको, ताबो
  • चौथा दिन – काज़ा ही काज़ा में 
  • पाँचवाँ दिन – काज़ा से की, किब्बर, चिचम वापिस काज़ा 
  • छठा दिन – काज़ा से लांग्ज़ा, हिक्किम, कॉमिक वापिस काज़ा 
  • सातवाँ दिन – काज़ा से पिन वैली से ढंकर 
  • आठवाँ दिन – ढंकर से नाको 
  • नौवां दिन – नाको से रेकोंग पीओ से कल्पा
  • दसवाँ दिन – कल्पा से शिमला , शिमला से दिल्ली

स्पीति वैली के गाँवों की कहानी

बर्फ़ सरकती सरकती रोड पर आ जाएगी

विंटर स्पीति ट्रांसपोर्ट अवेलेबिलिटी

दिल्ली से शिमला या रामपुर

दिल्ली से शिमला पहुँचना उतना ही आसान है जितना आसान इस ट्रिप के बारे में सोचना है। ISBT कश्मीरी गेट या फिर मजनू का टीला से आसानी से शिमला के लिए बसें मिल जाएंगी, वैसे सर्दियों में शिमला जाने वाले लोगों की तादाद में कुछ ज्यादा ही इज़ाफ़ा हो जाता है तो इस भसूड़ी से बचने के लिए एडवांस बुकिंग कर लें.

अगर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जा रहे हैं तो ISBT कश्मीरी गेट से शाम 7:24 पर एक AC बस जाती है जो आपको सुबह 9 बजे के आस पास रामपुर छोड़ देगी। इस बस के अलावा भी दो और जनरल बसें जाती हैं रामपुर तक।

कश्मीरी गेट ISBT से शाम 8:10 पर सीधा रेकोंग पीओ के लिए एक जनरल बस निकलती है. अगर आप बस में ऐसे पहाड़ी रास्तों में 16 घंटे का सफर कर सकते हैं तो फिर आप यह बस पकड़ के सीधा पीओ निकल लीजिये।

रामपुर/शिमला से रेकोंग पीओ 

वैसे तो आप दिल्ली से सीधा रेकोंग पीओ पहुँच सकते हैं. अगर आप जर्नी को तोडना चाहते हैं तो दिल्ली टू शिमला या फिर दिल्ली टू रामपुर की बस पकड़िए और आगे की जर्नी यहाँ से कंटीन्यू कर सकते है। शिमला पहुँचते ही आपको ISBT ( नए वाले बस स्टैंड ) से ही आगे की बस मिल जाएगी और इसी बस को आप रामपुर से पकड़ सकते हैं। रामपुर से रेकोंग पीओ के लिए आपको टेम्पो ट्रैवलर भी मिल जाएँगी।

रेकोंग पीओ से काज़ा

रेकोंग पीओ से काज़ा के लिए सिर्फ एक बस चलती है — सुबह 5 बजे, रेकोंग पीओ बस स्टैंड से। इसलिए अगर पिछले रोज़ आप पीओ में न ठहर के कल्पा गए थे, तो आपको सुबह सुबह पीओ आना पड़ेगा और इस बस की कोई एडवांस बुकिंग भी नहीं होती है। सुबह जब बस स्टैंड पर आती है तो ही टिकट मिलते हैं, इसलिए काज़ा की तरफ जाते वक़्त पीओ कैंसिल कर दें — क्योंकि वापसी इसी रास्ते से होगी और तब आप कल्पा देख सकते हैं।

Mud in winter

काज़ा से की/किब्बर/चिचम

सर्दियों में जब भी बर्फ़बारी होती है, काज़ा किब्बर वाला रोड कुछ रोज़ के लिए बंद हो जाता है. हालाँकि, ये ज्यादा दिन बंद नहीं रहता है। वैसे समर में इस रोड पर रोज़ाना शाम को एक बस चलती है पर विंटर में यहाँ पब्लिक ट्रांसपोर्ट का कोई सीन नहीं है. आपको टैक्सी करनी ही पड़ेगी। वैसे तो प्राइवेट टैक्सी ही सही रहेगी पर अगर आप अकेले हैं, तो टैक्सी का किराया शायद थोड़ा ज्यादा पड़ सकता हैं. चांसेज़ और लक ठीक हुए तो आपको शेयर्ड कैब भी मिल जाएगी। आप अपनी इंटरपर्सनल स्किल्स का फायदा उठाकर टैक्सी यूनियन वालों से बात करके इस प्रॉब्लम का सोल्युशन निकाल सकते हैं — आपकी हमारी तरह ही कुछ और भी लोग अकेले आते हैं और उनको आप अपनी प्राइवेट टैक्सी में जगह दे के किराया शेयर कर सकते हैं. इसके अलावा यह हो सकता हैं कि आप जहाँ रुके हैं वहां कुछ और भी लोग रुके होंगे। उनसे बात करके देखिए, किसी न किसी के पास कोई एक आध सीट तो ज़रूर खाली होगी। आपका काम बन जाएगा।

सबसे ऊँचे पोस्ट ऑफिस की कहानी

काज़ा से लांग्ज़ा/कॉमिक/हिक्किम

इस रस्ते की कंडीशन किब्बर वाले रोड की तरह ही होती है। सेम रूल्स एंड जुगाड्स अप्लाई! 

Langza Buddha in winter
अपने बुद्धा जी के साथ अपने लोग

काज़ा से पिन वैली

गर्मियों में पिन वैली के लिए काज़ा से रोज़ शाम एक बस आती है जो रात को रुक कर, अगली सुबह वापस काज़ा जाती है. सर्दियों में यह बस बंद रहती है और पिन वैली वाला रोड़ भी हमेशा खुला नहीं रहता है। यहाँ  भी आपको टैक्सी ही करनी पड़ेगी, सुबह जल्दी काज़ा से निकल लीजिए ताकि शाम को अँधेरा होने से पहले वापिस काज़ा पहुँच जाएँ। विंटर स्पीति में रात के सफर का मतलब है बहुत ही ज़्यादा ठंड, बहुत ज़्यादा का मतलब बहुत ज़्यादा है और इसको नज़अंदाज़ बिलकुल नहीं किया जा चाहिए। अगर आप पिन वैली में रात बिताना चाहते हैं तो बिता सकते हैं।

और खेत कुछ ऐसे दिखते हैं।

अब जब कहाँ कहाँ और कैसे कैसे जाना है पता चल गया हैं तो बात आती है रहने और खाने पर।

रेकोंग पीओ – रेकोंग पीओ बस स्टैंड के ठीक सामने थोड़ी सी चढाई के बाद एक गेस्ट हाउस है जिसका नाम अभी हमें याद नहीं आ रहा है. जैसे ही याद आएगा, अपडेट कर देंगे। इस गेस्ट हाउस में आपको डोरमेट्री और प्राइवेट रूम दोनों मिल जायेंगे, डोरमेट्री में 100 रूपये में बेड मिल जाता है। गेस्ट हाउस के नीचे ही आपके खाने का जुगाड़ हो जायेगा, कढ़ी चावल अच्छे हैं,  ट्राइ कर सकते हैं।

काज़ा सोलो योलो गेस्ट हाउस, 700-800 रूपए में डोरमेट्री बेड के साथ डिनर, ब्रेकफास्ट और चाय। सन्नी तोमर – 9354100647 

मुड – तारा गेस्ट हाउस – 8988062293, प्राइस का हमें आईडिया नहीं है क्योंकि हम जब भी मुड में रुके हैं, हमने कैंपिंग की है. हाँ, चाय और चिल्ल के लिए हम इनके यहाँ ही आते थे तो जानते है थोड़ा बहुत। वैसे और भी काफी होम स्टे हैं गाँव में।

और नदियाँ कुछ ऐसी दिखती हैं।

वैसे विंटर स्पीति जाने से पहले सिर्फ इतना सब जानना ही काफी नहीं है, और भी कई सारी चीज़ें हैं जिनको इग्नोर नहीं कर सकते है पर अगर अभी वो सब ले के बैठ गए तो थोड़ा लंबा खिंच जायेगा। अगली बार उस बारे में बात करेंगे – इसी गाइड के पार्ट 2 में!

तब तक Julley !

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